क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!… hindi poetry on love

अब ना जाने क्यों ऐसा लगता हैं,
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!
कोई एक, जो था नहीं कुछ भी मेरे लिए,
आज क्यों वो मेरा सबकुछ जैसा लगता हैं।
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!…

ना जाने क्यों ऐसा लगता हैं,
सोने के बाद भी वो मुजमे कही जगता हैं।
आहट तक न थी जैसे लम्हो की ज़िन्दगी में,
आज क्यों उसके संग हर लम्हा वैसा लगता है।
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!…

ना जाने क्यों ऐसा लगता हैं,
हर हवा का झोंका\ एक संदेशा लगता हैं।
जो लिख रहा हो उसको रोज मुझमे कतरा-कतरा,
क्यों वो एक कलम जैसा लगता हैं।
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!…

ना जाने क्यों ऐसा लगता हैं,
वो मेरी सांसो के साथ चलता हैं।
वो नहीं था फिर भी तो ज़िंदा था मैं,
आज क्यों वो मेरी साँसों जैसा लगता हैं।
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!…

ना जाने क्यों ऐसा लगता हैं
क्या बताऊ यार, कैसा लगता हैं!…

-महावीर जैन

best hindi love poem

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