दर्द बेअसर हो रहे हैं… hindi motivational poem

 

मुसलसल आते ख्वाब दरबदर हो रहे हैं,
बचपन खोकर हम मजबूर इस कदर हो रहे हैं।

किस राह जाना था और किस राह चल दिए,
चंद कागज़ के टुकड़ो की खोज में अनचाहे सफर हो रहे हैं।

वक्त भी वाकिफ हैं आने वाली मुश्किलों से,
फिर न जाने क्यों ये लम्हे बेसबर हो रहे हैं।

ख़ुशी-ख़ुशी बहुत कुछ पाकर खो दिया,
उनकी याद में अब आँखों को अश्क मयस्सर हो रहे हैं।

माना की तन्हा हैं एक तरफ “खामोश” कही तो,
मगर कुछ दर्द साथ हैं तो बाकी सारे दर्द बेअसर हो रहे हैं।

-महावीर जैन

best gazal

 

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