सुस्वागतम !

शेर-ओ-शायरी, ग़ज़ल, नज़्म सब हैं और क्या चाहिए!
    यहाँ सारे जज़्बातो का सबब हैं और क्या चाहिए!    

तो आइये चलते हैं महफ़िल सजाने..
जज़्बातो को लफ्ज़ो से मिलाने,
कुछ खुद को रुलाने,
कुछ गम भुलाने,
कुछ नग्मे साथ गुनगुनाने,
कुछ रुकी-सी धड़कनो को ज़िन्दगी दिलाने,
अब भूलते हैं सारे गम,
करके कुछ बहाने…
चलो अब जीते है मिलजुल कर shayrana.in के साथ…